बिलासपुर- शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की हालत दिन ब दिन बदत्तर होती जा रही हैं. शालेय शिक्षकों के स्थानांतरण एवं पदोन्नती में बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ स्वंय सरकार ने ही कार्यवाही की है. जिसके तहत् दर्जनो जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा संचालक भी निलंबित किये गये है. विगत् दिनों हजारों शिक्षकों की पदस्थापना और पदोन्नती में मनमानी तौर पर शासकीय आदेशो व नियमों का उल्लघन करते हुए शिक्षा अधिकारियों ने हजारों शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नती के मामलों में आर्थिक सौदेबाजी कर चहेते तथा सौदेबाज शिक्षकों को मनचाहे शालाओं में स्थानांतरित किया था और इसी प्रकार तमाम शिक्षकों की पदोन्नती की गई थी. इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में शिकायतें आने पर सरकार को होश आया और सभी मामलों में रोक लगाते हुए जिम्मेदारियों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई. इस मामले में जांच चल ही रही कि प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्य सरकार द्धारा विशिष्ट उपलब्धि के रूप में बहुप्रचारित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में भी शिक्षकों, कर्मचारियों को पिछले कुछ महिनों से वेतन अप्राप्त होने की शिकायतें भी सामने आ रही है. गौरतलब है कि राज्य सरकार द्धारा विभिन्न जिलों में प्राथमिक स्तर अंग्रेजी माध्यम से निशुल्क और अच्छी शिक्षा देने के उद्धेश्य से स्वामी आत्मानंद स्कूल योजना आरंभी की गई है जो मुख्यमंत्री का अहम प्रोजेक्ट है. इन शालाओं में शिक्षकों एवं कर्मियों का वेतन भुगतान जिला खनिज न्यास के माध्यम से किया जाता है. जिले में जिला कलेक्टर खनिज न्यास (DMF) फंड के अध्यक्ष होते है. तथा इसी फंड से स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम शालाओं में वेतन भुगतान किया जाता है. वैसे तो स्वामी आत्मानंद स्कूलों में भर्तीयों को लेकर भी तमाम शिकायतें आते ही रहें है लेकिन फिर भी सस्ती एवं अच्छी अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के आकर्षण से आम जनता में इन स्कूलों की स्थापना से अच्छी प्रतिक्रिया हुई और लोगों ने शासन की इस योजना को काफी सराहा. स्वंय मुख्यमंत्री और सभी छोटे-बड़े कांग्र्रेस नेताओं द्धारा स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम शालाओं को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति के रूप में प्रचारित किया जाता है.

कहावत है कि प्रथमग्रासे मच्छिकापात: यह कहावत स्वामी आत्मानंद शालाओं के लिए भी सटीक साबित हो रही है. विभिन्न जिलों में संचालित शालाओं के शिक्षक वेतन के लिए गुहार लगा रहे हैं. ऐसा ही एक मामला बिलासपुर जिले के करगीकला, कोटा स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल का मामला सामने आया है. शिक्षकों में जिम्मेदार अधिकारियों को आवेदन देकर गत् जुलाई माह से अब तक मासिक वेतन प्राप्त न होने की शिकायत करते हुए उन्हें शीघ्र ही वेतन भुगतान करने का आग्रह किया हैं. छत्तीसगढ़ आजतक को विभिन्न जिलों से ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं. राज्य शासन की इस महत्वकांक्षी शिक्षा योजना में शिक्षकों एवं कर्मियों को समय पर वेतन भुगतान नहीं होने से शालाओं में अध्ययनरत् बच्चों को कैसे शिक्षा मिलेगी इसे सहज ही अंदाज लगाया जा सकता हैं. इसी प्रकार प्रदेश में धान खरीदी के लिए मार्कफेड नोडल एंजेसी का काम करती है. धान खरीदी में मार्कफेड एवं उसके सेवा सहकारी समितियों की प्रमुख भूमिका होती है. पिछले कई महीनों से यहां भी कर्मचारियों का भुगतान नहीं हुआ है. संविदा कर्मचारी और संविदा शिक्षक अपने मांगों को लेकर आंदोलनरत् है.
शिक्षा के क्षेत्र में शालाओं के उन्नयन हेतु शासन द्धारा स्वीकृत राशियों के दुरूपयोग, खेल-कूद एवं फर्नीचर सामानों की खरीदी में हेराफेरी और अब स्वामी आत्मानंद स्कूलों में वेतन भुगतान न होने की शिकायत राज्य सरकार के लिए चुनौती और चिंता का विषय है यदि शीघ्र ही समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो आसन्न विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
