छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि एवं मंडल ने कलेक्ट्रेट घेराव कर भारत में कॉमन सिविल कोड/समान नागरिक संहिता (UCC) बिल लागू ना करने तथा मणिपुर में आदिवासियों महिलाओं के साथ बर्बर और घृणित कार्य किए जाने के विरोध में एवं एम.पी. के सीधी में आदिवासी पर मूत्र विसर्जन करने पर कड़ी कार्यवाही करने के लिए संयुक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे.


1. भारत देश में सभी जनजातियों के प्रथागत कानून समाप्त हो जायेगा.
2.प्रथागत कानून के संबंध में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 (CNT ACT), संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 (SPT ACT) और देश के प्रत्येक राज्यों में जमीन संबंधी आदिवासियों के लिए अधिनियम बने है. विलकिन्सन रूत 1837, पैसा अधिनियम 1996, पांचवी अनुसूची, छठी अनुसूची, समता जजमेंट आदि के तहत उल्लेखित विशिष्ट प्रावधान एवं सुरक्षा समान नागरिक संहिता के लागू होने से समाप्त हो जायेगें.
3.यू.सी.सी. के लागू होने से पूरे भारतवर्ष में विवाह, तलाक, विभाजन, गोद लेने, विरासत और उत्तराधिकारी के संबंध में एक समान कानून होंगे. यह विभिन्न अद्वितीय प्रथागत कानूनों को नष्ट कर देगा.
4.आदिवासियों की रीति-रिवाजों को कमजोर कर देगी जिन्हें कानून का बल दिया गया है. यह प्रथागत कानून को एक समान कानून में बदल देगा और उनके उल्लंघन को दडनीय अपराध बना देगा.

5.वंशानुक्रम और उत्तराधिकारी की मातृसत्तात्मक और पितृसातमक दोनो पद्धतियों का पालन करने वाली जनजातियां प्रभावित होगी. इससे दोनों के समाजिक ढांचे में खलल पड़ जाएगा अर्थात टूट आएगा.
6.महिलाओं को संपत्ति का समान अधिकार दिया जायेगा अर्थात यह है कि पैतृक भूमि (भूमिहारी मुण्डारी खुंटखट्टी रैयाती) और पूरे देश में जो जमीन संबंधी कानून बने है आदि को समान हिंदु कानून के आधार समान रूप से विभाजित किया जाएगा इससे विखंडन की समस्याए और भी बढ़ेंगे.
7.यह देश की महिलाओं को पुश्तैनी जमीन के मालिक होने और किसी को भी खरीदने बेचने के लिए सशक्त करेगा. इससे विवाह विरासत आदि के माध्यम से निहित स्वार्थ द्वारा भूमि हडपने और अलगाव को और बढ़ावा मिलेगा.
8. मणिपुर में आदिवासी महिलाओं के साथ बर्बर, घृणित एवं मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाएं हो रही है. भारत सरकार मणिपुर के मुख्यमंत्री को बर्खास्त करे एवं माननीया राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध है कि जल्द से जल्द राष्ट्रपति शासन लागू कर मणिपुर में शांति बहार करने की कृपा करें.
9. म.प्र. के सीधी में तथाकथित बीजेपी पदाधिकारी द्वारा एक आदिवासी के सिर पर मूत्र विसर्जन करने की अमानवीय कृत्य किया गया जो मानवीयता को शर्मसार करने वाली है. आजादी के 75 वर्ष बाद भी घृणित मानसिकता को प्रदर्शित करता है जो अति निदंनीय है. हम इसका विरोध करते है. महामहिम राष्ट्रपति महोदया से अनुरोध करते है कि ऐसे मानसिकता के लोगों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करे ताकि भविष्य में ऐसे कार्यों की पुनरावृत्ति न हो. संवैधानिक अधिकार अनुच्छेदो एक्टो अधिनियमों, पांचवी अनुसूची, छठी अनुसूची, पैसा एक्ट 1996 एवं 13 (3) (क) के नियमों कानूनों आदि में आदिवासियों / अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजातियों के समुचित समुदाय को प्राप्त संवैधानिक के विरूद्ध भारत देश में कॉमन सिविल कोड / समान नागरिक संहिता बिल भारत देश में ना लागू किया जाए.
इसमें अध्यक्ष सुदर्शन सिंह ठाकुर, सचिव तोषण कुमार ठाकुर, प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष मदनलाल कोर्पे, प्रदेश महासचिव हीरालाल नायक, अध्यक्ष महिला प्रभाग पुनीता ठाकुर, उपाध्यक्ष चंद्रिका रावटे राकेश मिंज शिव प्रसाद चंद्रवंशी, सहसचिव प्रमोद पन्ना भूपत भूआर्य ओमप्रकाश चंद्रवंशी, कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार टोप्पो, कार्यकारिणी सदस्य मधेश्वर शाह शामिल थे.
