छत्तीसगढ़ी कला एवं संस्कृति का संरक्षण करना जरूरी – पद्मश्री ममता चंद्राकर
चिन्हारी साहित्य समिति भिलाई द्वारा वर्ष 2023 का चिन्हारी सम्मान शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. दीनदयाल दिल्लीवार को दिया गया है. पुरस्कार कार्यक्रम की मुख्य अतिथि इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति पद्मश्री ममता चंद्राकर, संसदीय सचिव एवं गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद अन्य अतिथि डॉ. राजेश श्रीवास, डॉ. मृदुला सिंह, डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप, डोमन लाल ध्रुव आदि के द्वारा स्वामी स्वरूपानंद महाविद्यालय के सभागार में प्रदान किया गया. ज्ञात हो कि डॉ. दीनदयाल अंचल के मूर्धन्य साहित्यकार डॉ. तेजराम दिल्लीवार के सुपुत्र हैं एवं वर्तमान में शासकीय महाविद्यालय बेलौदी जिला बालोद में सहायक प्राध्यापक हिन्दी के पद पर कार्यरत हैं.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. ममता चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति अत्यंत ही समृद्ध है जिसे सहेज कर रखना नितांत जरूरी है. राज्य की कला संस्कृति को प्रदेश सरकार द्वारा संरक्षण एवं प्रोत्साहित करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने चिन्हारी सम्मान से सम्मानित डॉ. दीनदयाल दिल्लीवार को हार्दिक बधाई दी. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. भूपेन्द्र कुलदीप ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ अंचल में छत्तीसगढ़ी भाषा में साहित्य की प्रत्येक विधाओं की सृजन हो रहा है. भविष्य में इसे बनाए रखने और छत्तीसगढ़ी भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने से भाषायी विकास संभव है. विशिष्ट अतिथि संसदीय सचिव व विधायक कुंवर सिंह निषाद ने कहा कि छत्तीसगढ़ी कला संस्कृति एवं भाषा को अधिक से अधिक प्रसारित करने की आवश्यकता है. उन्होने छत्तीसगढ़ी में एम.ए. करने वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने एवं इसे विस्तारित करने की बात कही. छत्तीसगढ़ी गायन से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस अवसर पर बतौर वक्ता डॉ. राजेश श्रीवास, डॉ. अमिनेश सुराना, डॉ. मृदुला सिंह, डॉ. डीएस ठाकुर, डॉ. विद्या चंद्राकर, डोमन लाल ध्रुव आदि ने दुर्गा प्रसाद पारकर लिखित विभिन्न रचनाओं के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए.
छत्तीसगढ़ चिन्हारी साहित्य समिति के संयोजक दुर्गा प्रसाद पारकर ने एम ए छत्तीसगढ़ी को सभी महाविद्यालय में शामिल करने मुख्यमंत्री के नाम संसदीय सचिव को पत्र प्रेषित किया. कार्यक्रम में रजनी रजक द्वारा राजगीत एवं लोकगायिका पूनम विराट ने छत्तीसगढ़ी गीत प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार सीताराम साहू “श्याम” ने एवं स्वामी स्वरूपानंद महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने आभार प्रदर्शन किया.
