छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मोहन नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत फर्जी ईडी के अधिकारी बनकर चावल कारोबारी से 2 करोड़ की ठगी मामले में एक महिला समेत 9 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया हैं. इस ठगी के मामले में अभी भी 3 आरोपी फरार चल रहे है. पुलिस ने आरोपियों में पास से ठगी के 1 करोड़ 25 लाख रुपये जप्त किए हैं. आरोपियों के खिलाफ कर्नाटक में भी अपराध दर्ज है. आरोपियों के पास से सीबीआई सहित विभिन्न सरकारी खुफिया एजेंसियों के आई कार्ड और वीआईपी गाड़ियों में लगने वाले सायरन भी बरामद किए हैं.

इस तरह घटना को दिया अंजाम
आरोपियों ने ईडी के फर्जी अधिकारी बनकर दुर्ग के चावल व्यापारी के घर रेड मारकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया था. तलाशी के दौरान आरोपियों को 2 करोड़ मिले. आरोपियों ने ईडी का आई कार्ड दिखाकर नकदी रकम समेत चावल व्यापारी विनीत गुप्ता को स्कार्पियो गाड़ी में बैठाकर अपने साथ लेकर गए. आरोपियों ने व्यापारी को राजनांदगांव सोमनी के टोल प्लाजा से पहले उतारकर पैसे लेकर फरार हो गए.
चावल व्यापारी ने इस पूरे मामले की जानकारी मोहन नगर पुलिस को दी. जिसके बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपियों की खोजने में लग गई. पुलिस ने आरोपियों के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपियों की शिनाख्त कर गिरफ्तारी में जुट गई. पुलिस को जानकारी मिली कि मालवीय नगर चौक स्थित एवलॉन होटल में गिरीश वालेचा नाम का व्यक्ति घटना के एक दिन पूर्व आकर रुका हुआ था. जहां से पुलिस को गिरीश वालेचा का आधार कार्ड मिला पुलिस गिरीश वालेचा के बारे में जानकारी जुटाई तो पता चल कि गिरीश वालेचा सितंबर 2022 को खुद को सीआईडी ऑफिसर बताकर गोरेगांव मुंबई में ठगी की वारदात को अंजाम दिया था.
दुर्ग पुलिस ने गोरेगांव महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क किया गया और सीसीटीवी फुटेज भेजकर गिरीश वालेचा का मिलान किया. गोरेगांव पुलिस ने गिरीश के 3 ने साथियों की पहचान की जिसके बाद दुर्ग पुलिस मुंबई में गिरीश वालेचा को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया.
गिरीश वालेचा ने पूछताछ में बताया कि इस ठगी में मुंबई के अब्दुल हमीद, श्रीधर पिल्ले, जीवा आहिर, रोहित पाठक, मंगल पटेल, कृष्णा श्रीमाला, किशोर चौबल, नासिक के संजय आईरे, राशिद, शाहिद, हासिम और गिरीश की पत्नी नगमा अंसारी ने योजना बनाकर चावल व्यापारी के ऑफिस में पहुंचकर ईडी के अधिकार बताकर 2 करोड़ की ठगी की वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया है.
