गजेंद्र वर्मा भिलाई- बोरसी में पदस्थ पटवारी सूर्यकातं निषाद का स्थानांतरण यहां से पुरई में कर दिया गया है. इसके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के अनेक शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करना तो दूर मात्र स्थानांतरण करके राजस्व विभाग के अफसरों ने अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर लिया है. जबकि गंभीर शिकायत और हेराफेरी की जांच करने के बाद दोषी पाये जाने पर दंडात्मक कार्रवाई किया जाना था लेकिन उसे बचाने की मंशा से संबधित अफसरों ने उनका मात्र तबादला करना उचित ही समझा. इससे यह साबित हो रहा है कि भ्रष्टाचारी को पनाह देने में उच्चधिकारियों का हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता.

विगत् दिनों “छत्तीसगढ़ आजतक” ने दुर्ग तहसील के पटवारी सूर्यकांत निषाद के काले कारनामों का सनसनीखेज खुलासा किया था. जिस पर विभाग ने कार्रवाई करने के बजाए उसका स्थानांतरण पटवारी हल्का नं.39 (ग्राम बोरसी) से पटवारी हल्का नं.54 (ग्राम पुरई) में कर दिया. स्थानांतरण आदेश 11 मई 2023 को जारी किया गया. यह आदेश दुर्ग एसडीएम मुकेश रावटे ने जारी किया.
उल्लेखनीय है कि पटवारी ने अपनी पत्नी सुनीति निषाद (आरआई) के नाम पर खसरा नं.363/36 व 363/45 की जमीनें खरीदी है जो अवैध प्लाटिंग की जमीनें है. सच ये है कि छत्तीसगढ़ शासन के भुईया एप्प में उक्त जमीन के मालिकाना हक खरीददार का नाम A और उसके पिता व पति का नाम B दर्शाया गया है. जबकि A और B कि जगह खरीददार और उसके पिता का वास्तविक नाम दर्शाया जाना चाहिए था. इस तरह दस्तावेज में हेरफेर व छेड़छाड़ किया जाना दंडनीय अपराध है.
छत्तीसगढ़ आजतक के पोर्टल में प्रकाशित खबर के माध्यम से अधिकारियों को जानकारी होने पर पटवारी सूर्यकांत निषाद के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुरई में उसे स्थानांतरित कर दिया गया. जब उनके काले कारनामें उजागर हो चुके हैं तो आखिर एसडीएम उसे बचाना क्यों चाहते हैं? क्या इसकी जानकारी क्लेक्टर को नहीं है? आखिर स्थानांतरण करने से क्या भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाएगा?
