कबीरधाम : जिले के सहसपुर लोहारा ब्लॉक अंतर्गत दूरस्थ वनांचल गांव में प्रशासन की टीम ने गुरुवार को रामनवमी पर हो रहे बाल विवाह को रुकवाया. यहां परिजन झांसा देने के लिए आधार कार्ड में 21 साल उम्र दिखाकर लड़के की शादी करा रहे थे. प्रशासन ने जब मार्कशीट की जांच की तो वह 17 साल का निकला.

दरअसल, जिला प्रशासन की टीम को गांव में बाल विवाह कराए जाने की सूचना मिली थी. इस पर टीम वहां पहुंची और परिजनों से दस्तावेज मांगे. परिजनों ने आधार कार्ड प्रस्तुत किया तो उसमें लड़के की उम्र 21 साल चार माह थी. इस पर प्रशासन की टीम को शंका हुई और उन्होंने जन्म प्रमाण पत्र या शैक्षणिक प्रमाण पत्र की मांग की. पहले तो परिजन आनाकानी करते रहे, फिर पांचवीं की मार्कशीट मिली. उसके अनुसार लड़के की उम्र 17 साल नौ माह निकली.
जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्यनारायण राठौर ने बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप है. इसे रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 बनाया गया है. इसके तहत 21 वर्ष से कम आयु के लड़के और 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के विवाह प्रतिबंधित है. कोई व्यक्ति जो बाल विवाह करवाता है या करता है अथवा उसमें सहायता करता है उसे दो वर्ष तक कठोर कारावास अथवा जुर्माना जो कि 1 लाख तक हो सकता है अथवा दोनों से दंडित किये जाने का प्रावधान है.
