भिलाई : भिलाई में एक नवविवाहिता ने ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर बीते 15 मार्च की रात को खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह कर लिया. करीब 90% जली अवस्था में उसे सेक्टर-9 अस्पताल में भर्ती कराया गया. न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नवविवाहिता का मरणासन्न कथन लिया.

जिसमें महिला ने बताया था कि उसके ससुराल वाले दहेज न लाने की बात पर उससे मारपीट करते थे. उसे एक बेटी हुई तो ससुराल वालों का रवैया और ज्यादा कठोर हो गया. दहेज न लाने और बेटी पैदा करने की बात को लेकर उससे आए दिन मारपीट होती थी. जिससे परेशान होकर उसने आत्मदाह करने की बात कही थी. 23 मार्च को नवविवाहिता की मौत हो गई. जिसके बाद छावनी पुलिस ने उसके पति, सास, ससुर, जेठ, जेठानी और ननंद के खिलाफ दहेज हत्या की धारा के तहत प्राथमिकी की है.
पूनम ने छोटी बहन से कही थी ये बात
मृतिका पूनम ने मरने से पहले फोन पर अपनी बहन से बात किया था और कहा कि “मैं बहुत गलत जगह फंस गई हूं. यहां दहेज की बात को लेकर मेरा पति, सास, ससुर, जेठ, जेठानी और ननंद ताने मारते हैं, और मुझे कुत्ते की तरह पीटते हैं. यहां तक की दो वक्त की रोटी और पानी तक नहीं देते हैं. कहते हैं, खुद तो दहेज लाई नहीं है. और अब बेटी पैदा कर दी है. उसकी शादी और पालन पोषण का खर्च कौन उठाएगा. मुझे पीट-पीटकर घर से निकाल दिया गया”.
छावनी थाना क्षेत्र की घटना
पुलिस ने बताया कि केनाबांध बौरीपारा अंबिकापुर जिला सरगुजा निवासी अशोक कुमार गुप्ता की बेटी पूनम गुप्ता की शादी छावनी थाना क्षेत्र के महात्मा गांधी नगर कैंप-2 निवासी अनिल कुमार गुप्ता से हुई थी. पूनम गुप्ता ने 15 मार्च की रात को आत्मदाह कर लिया था. एसडीएम ने पूनम का मरणासन्न कथन लिया था.
साथ ही 23 मार्च को उसकी मौत होने के बाद छावनी पुलिस ने पूनम के पिता अशोक कुमार गुप्ता, दादी विमला देवी, बहन आरती गुप्ता और रिश्तेदार त्रिभुवन गुप्ता का बयान लिया. जिसमें उन्होंने पूनम के पति अनिल कुमार गुप्ता, ससुर उमाशंकर गुप्ता, सास शैल कुमार गुप्ता, जेठ संजय कुमार गुप्ता, जेठानी शालिनी गुप्ता और ननंद ज्योति गुप्ता पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया.
साथ ही उन्होंने पुलिस को बताया कि पूनम ने 1 फरवरी 2023 को एक बेटी को जन्म दिया. जिसके बाद आरोपितों ने उसे और ज्यादा परेशान करना शुरू कर दिया था. इसी से तंग आकर उसने आत्महत्या की है. मृतका के मृत्यु पूर्व कथन और मायके वालों के बयान के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी कर मामले की जांच शुरू की है.
मौत के तीन दिन बाद लिखी गई शिकायत
अशोक गुप्ता ने कहा कि 15 मार्च को बेटी के जलने के बाद वो थाने पहुंचे थे. वहां उनकी रिपोर्ट न लिखकर मामले को दबाने की बात की गई. पुलिस वालों ने कहा कि पहले बेटी का इलाज कराओ. रिपोर्ट बाद में भी लिखा सकते हो. इसके बाद जब बेटी की मौत हो गई. तब भी पुलिस की मानवता नहीं जागी. बेटी का पिता दहेज हत्या का मामला दर्ज करने की गुहार लगाता रहा. लेकिन पुलिस ने उसे उसके आवेदन की रिसीविंग तक देना मुनासिब नहीं समझा.
बेटी ने 23 मार्च को सुबह 6 बजे दम तोड़ दिया था. अशोक गुप्ता ने कहा कि मैं अपने परिवार के साथ तीन दिन से छावनी थाने के चक्कर काट रहा था. लेकिन पुलिस मामला दर्ज नहीं कर रही थी. हालत ये थे कि आवेदन की पावती तक 25 मार्च को दोपहर दी गई. जिसमें 24 मार्च की रिसीविंग दी गई है. अशोक कुमार का कहना है कि बेटी के ससुराल वाले उसे धमकी देकर खुलेआम घूम रहे हैं.
