नवरात्रि : कल से चैत्र नवरात्रि शुरु होने वाली है. कलश स्थापना के साथ ही चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ हो जाएगा. जो लोग पूरे 9 दिनों तक चैत्र नवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनके घर पर विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है और चैत्र शुक्ल नवमी तिथि को महानवमी या दुर्गा नवमी होती है. इन 9 तिथियों में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की पूजा करते हैं. फिर अगले दिन दशमी को हवन करके पारण होता है, हालांकि कई स्थानों पर दुर्गाष्टमी या महानवमी के दिन हवन के साथ पारण होता है. इस साल चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिन की है.

कलश स्थापना मुहूर्त 2023
चैत्र नवरात्रि के कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 23 मिनट से सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक है. इस समय में आप विधि विधान से कलश स्थापना करें. फिर मां शैलपुत्री की पूजा करें. नवदुर्गा में मां शैलपुत्री प्रथम अवतार हैं. कलश के पास एक अखंड जोत जलाई जाती है. इस बात का ध्यान रखते हैं कि वह जोत कभी भी बुझे न. जब नवरात्रि खत्म होती है यानि मां दुर्गा विदा होती हैं तो उस अखंड जोत को शांत करते हैं.
भक्तों के सभी कार्य होंगे सफल
हर नवरात्रि में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर धरती पर आती हैं, जिसका अलग-अलग अर्थ और संकेत होता है. इस बार चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आ रही हैं. जिससे बेहद शुभ योग बन रहा है. यह शुभ संयोग 110 साल बाद बन रहा है. क्योंकि इस बार मां दुर्गा पूरे 9 दिन तक विराजमान रहेंगी.
ज्योतिषों के मुताबिक इस साल माता रानी का आना और जाना दोनों ही शुभ स्थिति में होने जा रहा है.नौका पर माता इस बात का संकेत लेकर आती हैं कि सर्व काम में सिद्धि प्राप्त होगी और बाधा नहीं सताएगी. यानी कि इस बार मां के भक्तों के सभी काम बनेंगे. जहां मां का आगमन बुधवार के दिन है तो वहीं मां का प्रस्थान गुरुवार के दिन है. बुधवार के दिन नौका पर आती माता बुद्धि, विवेक, चातुर्य और मानसिक बल को दर्शाएंगी.
इस तरह तय होता है माता का वाहन
विद्वानों के अनुसार जब मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं तो ज्यादा बारिश होती है. घोड़े पर सवार होकर मां दुर्गा आती हैं तो युद्ध के हालात बनते हैं. नौका पर सवार होकर माता रानी आती हैं तो यह शुभ फलदायी होता है. यदि मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आती हैं तो महामारी का का अंदेशा होता है.
विदाई के वाहन भी अलग
मां दुर्गा की विदाई भी अलग-अलग वाहन से होती है. रविवार या सोमवार को मां दुर्गा भैंसे की सवारी से प्रस्थान करती हैं. इससे देश में रोग और कष्ट बढ़ता है. शनिवार या मंगलवार को मां मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं. जिससे जनता में दुख और कष्ठ बढ़ता है. बुधवार और शुक्रवार में माता रानी हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं. इससे बारिश अधिक होती है. गुरुवार को मां दुर्गा मनुष्य की सवारी से जाती हैं. इसका अर्थ है कि सुख-शांति बनी रहेगी.
