मानसून सत्र का दूसरा दिन: वेदांता संयंत्र हादसे को लेकर भूपेश बघेल और चरणदास महंत ने सरकार को घेरा, विपक्ष का वॉकआउट

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. वेदांता संयंत्र में हुए हादसे और उसमें दर्ज एफआईआर (FIR) को लेकर विपक्ष ने सरकार को चौतरफा घेरा. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से पूछा कि जब एफआईआर में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम दर्ज है, तो अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई.
प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश के उद्योगों में हुई दुर्घटनाओं और सेफ्टी ऑडिट का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में औद्योगिक दुर्घटनाएं हुई हैं और वेदांता हादसे में 25 लोगों की जान गई. उन्होंने सरकार से पूछा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है.
जवाब में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि वेदांता मामले की जांच जारी है. उन्होंने बताया कि मामला श्रम न्यायालय में भी दायर किया गया है और पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में अनिल अग्रवाल का नाम शामिल है. मंत्री के इस जवाब पर डॉ. महंत ने कहा, “अगर एफआईआर में नाम है तो गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? सरकार आखिर किस बात का इंतजार कर रही है?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अनिल अग्रवाल का नाम लेने से बच रही है.
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी चर्चा में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि जब एफआईआर में किसी का नाम दर्ज है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या केवल एफआईआर दर्ज कर देने से कार्रवाई पूरी हो जाती है या फिर गिरफ्तारी की दिशा में भी कोई कदम उठाया गया है.
भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर के बीच तीखी नोकझोंक
इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि विधानसभा में किसी व्यक्ति का नाम लेकर कार्रवाई की घोषणा नहीं की जा सकती. इस पर भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि एफआईआर में नाम पहले से दर्ज है, ऐसे में नाम लेने से परहेज क्यों किया जा रहा है. उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन को आश्वस्त किया कि जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष का वॉकआउट
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सदन को आश्वस्त करने का प्रयास किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि, मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और उन्होंने सदन में सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. भारी हंगामे और विरोध के बीच विपक्ष के सभी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया.
