दुर्ग जिले में सीमांकन और रकबा बैठाने के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता और सौदेबाजी के आरोप सामने आए हैं.शिकायतकर्ता रजत सुराना ने प्रेस नोट जारी कर राजस्व विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
कि वर्तमान में आरआई द्वारा विवादित सीमांकन प्रकरणों को जानबूझकर पेचीदा बताकर “टीम फॉर्मेशन” के नाम पर रकम की मांग की जाती है. आरोप है कि पसंदीदा लोगों को टीम में शामिल कर पक्षपातपूर्ण तरीके से सीमांकन और रकबा बैठाने का कार्य किया जाता है.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पूरे मामले का “मास्टरमाइंड” आरआई विजय शर्मा हैं जो अधिकांश विवादित सीमांकन प्रकरणों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
सड़क की भूमि को निजी खसरे में जोड़ने का आरोप
रजत सुराना ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 में पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 80/3 की भूमि खरीदी थी. आरोप है कि उस भूमि के बीच आवागमन हेतु छोड़ी गई 30 और 60 फीट चौड़ी सड़क आज भी मौके पर मौजूद है लेकिन उसका रकबा मूल खसरा नंबर 80/3 में दर्ज है.
उन्होंने आरोप लगाया कि अब राजनीतिक प्रभाव और दबाव का उपयोग कर उक्त सड़क-रास्ते की भूमि को उनके खसरा नंबर 80/352 में समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है.
रिश्वत मांगने का भी आरोप
प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि आरआई विजय शर्मा द्वारा 25 लाख रुपये की मांग की गई थी.शिकायतकर्ता का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर उनकी आपत्ति को रिकॉर्ड में नहीं लिया गया.
निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पिछले वर्षों में हुए सभी विवादित सीमांकन और रकबा बैठाने के मामलों की पुनः जांच कराई जाए.साथ ही संबंधित आरआई को तत्काल प्रकरण से अलग करने कॉल डिटेल और रिकॉर्डिंग की जांच तथा सड़क की बचत भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में पृथक दर्ज करने की मांग की गई है.
रजत सुराना ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि दुर्ग जिले की सीमांकन प्रक्रिया और राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता से जुड़ा गंभीर विषय है.
