May 4, 2026

Blog


शिकायतों के बाद जांच के घेरे में अधिकारी

अंकित गौरहा के खुलासों से हिली जेडी और डीईओ की कुर्सी!

बिलासपुर में शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार को लेकर पिछले तीन महीनों से चल रही मुहिम अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है. कांग्रेस नेता अंकित गौरहा द्वारा लगातार उठाई गई शिकायतों और दस्तावेजी खुलासों के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है और विभाग में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है.

अंकित गौरहा ने पदोन्नति, युक्तिकरण, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को 20 से अधिक शिकायतें सौंपी थीं. इन शिकायतों के आधार पर अब प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है

हाल ही में गौरहा ने संयुक्त संचालक शिक्षा,बिलासपुर को एक और विस्तृत शिकायत सौंपी है, उस मामले में भी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की मुख्य भूमिका है.जिसमें पदोन्नति आदेशों में गड़बड़ी,न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और चयन प्रक्रिया में पक्षपात जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. शिकायत के दस्तावेज़ में स्पष्ट उल्लेख है कि कई मामलों में नियमों को दरकिनार कर मनमानी तरीके से पदोन्नति दी गई और वरिष्ठता सूची की भी अनदेखी की गई.वहीं यह विषय भी सामने आया कि न्यायालय के आदेशों के बावजूद संशोधित आदेश जारी कर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया.

अंकित गौरहा ने इसे शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बताते हुए कहा कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं होगी,तब तक बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं हो सकता. उनका कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार और न्याय सुनिश्चित करने के लिए है. वहीं, लगातार बढ़ते दबाव और शिकायतों के बाद संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला अब उच्च स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक गुरुजनों को उनका अधिकार और न्याय नहीं मिलेगा,यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा.